हमारी कहानी
एक छात्र से 5,000 से ज़्यादा तक
पहली क्लास से ही एक परिवार STC को संभालता आया है।
1992 में बेंगलुरु में अपने घर पर एक बच्चे को पढ़ाना शुरू किया, और 1995 में मैसूरु आ गईं। उनके पढ़ाने का तरीका आज भी STC की हर क्लास की पहचान है।
मैकेनिकल इंजीनियर, जिन्होंने स्वीडन की लिंशोपिंग यूनिवर्सिटी से सस्टेनेबल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में मास्टर्स किया है। वोल्वो और फोर्ब्स मार्शल में काम किया, और कार्बन मंडल की स्थापना की।
- 1992
शुरुआत एक बच्चे से हुई
सुजाता आर शेट्टी ने बेंगलुरु में अपने घर पर सिर्फ़ एक बच्चे, गुणशंकर, को पढ़ाना शुरू किया। पढ़ाने में और अपने छात्रों के साथ बिताए समय में उन्हें अपनी ज़िंदगी का असली मक़सद मिला।
- 1995
मैसूरु की ओर
सुजाता मैसूरु के बृंदावन एक्सटेंशन आ गईं और अपने घर पर बच्चों को पढ़ाना जारी रखा।
- 2001
हेब्बाल में नया घर
माता-पिता ने एक-दूसरे को बताया, और जल्द ही और बच्चे उनके घर आने लगे। सुजाता हेब्बाल आ गईं, और बैच बढ़ते गए।
हमारा अपना सेंटर
जैसे-जैसे और परिवार सीट माँगने लगे, क्लासें परिवार के घर से निकलकर हेब्बाल फर्स्ट स्टेज में हमारे अपने सेंटर में आ गईं।
- आज
5,000+ छात्र और एक नया अध्याय
अब तक 5,000 से ज़्यादा छात्र STC में पढ़ चुके हैं। सुजाता के बेटे रोशन राय निदेशक के रूप में उनके इस मिशन से जुड़े हैं। वे 30 साल की परंपरा में नए विचार ला रहे हैं, और इसके केंद्र में आज भी सुजाता का पढ़ाने का तरीका है।
क्या नहीं बदला
क्लासरूम आज भी घर जैसा लगता है। हमारे शिक्षक लगन वाले और स्नेह भरे हैं, और हर बच्चे को सुरक्षित रखते हैं, ताकि बच्चे सिर्फ़ अंकों में नहीं, एक इंसान के रूप में भी आगे बढ़ें। हम पढ़ाने के आज़माए हुए पुराने तरीकों को नए तरीकों के साथ जोड़ते हैं, भारत की परंपराओं और संस्कृति को ज़िंदा रखते हैं, और सिलेबस के साथ-साथ ज़िंदगी के सबक भी सिखाते हैं।